रीवा में सुपारी के छोटे आकार पर पूरी आकृति तराशने की परंपरा है। सूखे बीज से लघु मूर्तियाँ, सजावटी चीजें और दूसरे आकार बनाए जाते हैं। रीवा जिला प्रशासन के विवरण में टेबल लैम्प और ताजमहल जैसे नमूनों का भी उल्लेख मिलता है। मध्यप्रदेश पर्यटन का शिल्प परिचय इस काम में सामग्री चुनने और महीन औजार चलाने के कौशल पर ध्यान देता है।

चुनना, छीलना, रेशा पढ़ना

काम के लिए पहले सूखी सुपारी चुनी जाती है। जिला प्रशासन का हिंदी विवरण उसे छील-छीलकर आकार देने की बात करता है। पर्यटन विभाग के अनुसार महीन औजारों से तराशने के बाद हर टुकड़े की सतह हाथ से संवारी जाती है। सुपारी की अपनी प्राकृतिक बनावट तैयार चीज को अलग रूप देती है। इसी कारण दो वस्तुओं का डिजाइन मिलता-जुलता होने पर भी सामग्री की रेखाएँ अलग दिख सकती हैं।

लकड़ी के खिलौने से बदली सामग्री

जिला प्रशासन इस हस्तकला को रीवा के कुंदेर परिवार में विकसित परंपरा बताता है। उसी रिकॉर्ड के अनुसार परिवार पहले लकड़ी के खिलौने बनाता था। सुपारी पर लगातार प्रयोग करते हुए उसने नए आकार तैयार किए। यहाँ पुराना खिलौना बनाने का अनुभव एक अलग सामग्री पर काम आया। पर्यटन विभाग इस परंपरा को बीसवीं सदी की शुरुआत और तत्कालीन राजदरबार के संरक्षण से जोड़ता है; किसी निश्चित स्थापना-वर्ष की पुष्टि इन पृष्ठों में नहीं की गई है।

एक बीज, कई पैमाने

सरकारी परिचय में लघु देवी-देवता, अन्य आकृतियाँ, आभूषण और सजावटी वस्तुएँ दर्ज हैं। जिला पृष्ठ के लैम्प और ताजमहल जैसे नमूने इसकी रचना का बड़ा दायरा दिखाते हैं। इन तैयार चीजों को समझते समय उनका छोटा आकार और सतह पर बची प्राकृतिक बनावट देखने लायक है। सुपारी एक कच्ची सामग्री से ऐसा रूप लेती है जिसे कारीगर अपने हाथ से अंतिम रूप देते हैं।

उपलब्ध आधिकारिक परिचय महीन औजारों के नाम, जोड़ने के तरीके या किसी एक अंतिम लेप का मानक नहीं बताता। इसलिए यहाँ पूरे शिल्प की एक निश्चित निर्माण-विधि का दावा नहीं किया गया है। पुष्ट क्रम सूखी सुपारी चुनने, उसे छीलने-तराशने और हाथ से फिनिश देने का है। विस्तृत नमूनों के लिए जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के मूल पृष्ठ साथ दिए गए हैं।

मुख्य बातें

  • रीवा जिला प्रशासन सुपारी कला को कुंदेर परिवार में विकसित परंपरा बताता है, जिसकी पृष्ठभूमि लकड़ी के खिलौने बनाने में थी।
  • आधिकारिक पर्यटन विवरण के अनुसार सूखी सुपारी चुनी जाती है, महीन औजारों से तराशी और हाथ से चिकनी की जाती है।
  • सुपारी का अपना रेशा और सीमित आकार छिपाया नहीं जाता; उसी से छोटी मूर्तियां, आकृतियां, आभूषण और सजावटी वस्तुएं बनती हैं।

स्रोत और संदर्भ

  1. District Rewa, Government of Madhya Pradesh · Betel Nut's Toys ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. Madhya Pradesh Tourism · Timeless Art & Crafts of Madhya Pradesh — Supari Craft ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  3. Rewa Division, Government of Madhya Pradesh · सुपारी के खिलौने ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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